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विराट कोली कहते हैं जितने के लिए सही एटीट्यूड होना जरूरी है.

भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ी विराट कोहली को हर हिंदुस्तानी और दुनिया में क्रिकेट प्रेमी जानता ही है।

कुछ समय पहले विराट कोहली आप की अदालत के नाम के एक शो में आए थे टैब उनसे ये सवाल किया गया था कि आप पर इल्जाम है कि आप आक्रामक और एटीट्यूड रखते हैं और इस बात पर विराट कहते हैं कि हम एक खिलाड़ी के रूप में हमें एक सकारात्मक रवैया रखना चाहते हैं।

विराट कोली कहते हैं जितने के लिए सही एटीट्यूड होना जरूरी है.

साथ में विराट कहते थे कि मुझे खिलाड़ी के रूप में मैदान पर मोका मिलाता है, तब एम सिर्फ अपनी फारफॉर्मेंस पर ध्यान देता हूं या मैच सही दिसा में चल जाता है।

विराट कोली कहते हैं जितने के लिए सही एटीट्यूड होना जरूरी है

मुझे आउट होना और परफॉर्मेंस ना करना पसंद नहीं है

जब विराट से ये सवाल किया गया कि जब भी वो आउट हो गए तब बले को क्यों जमीन पर पटकते थे।

इस बात पर विराट कोहली बताते हैं कि बचपन से ही उनको बैटिंग का शोक हो रहा था या जब भी वो आउट हो गए थे तब उनको गुस्सा आता था कि उन्हें बढ़िया परफॉर्मेंस नहीं दी गई थी, उन्हें या बढ़िया या लंबे समय तक खेलना चाहिए था।

बचपन में खूब सारे बल्ले तोड़े गुस्सा आने पर घरवालों का नुक्सान भी होता था।

विराट ने कहा कि मुझे आउट होने पर और कम स्कोर पर आउट होने पर इतना गुस्सा आता था कि बैट ही तोड़ लाता था या मेरे घरवाले भी इस बात से परेशान रहते थे वो कहते थे कि गुस्सा कम किया करो फिर कुछ समय बाद जब एम 15 साल का था तब मेरे काउच राजकुमार शर्मा ने एक कॉन्टैक्ट दिलवाया बीडीएम कंपनी मेरठ से उन्हें मेरी काफी मदद मिली या साथ में उन्होंने कहा था कि आपको साल में सिर्फ 02 बेटियां मिलेंगी, तबसे मैंने बेटियां तोड़ने का काम कर दिया।

पिता की मौत की खबर के बाद भी मने मैच खेला।

जब मेरे पिता जी की दत्त हुई तब 17 साल का था या मेरे पिता जी की उम्र 55 साल थी मुझे रात को तकरीबन 2 बजे कॉल आया या मुझे पता चला कि मेरे पिता जी नहीं रहे तब मेरा दिल्ली रणजी ट्रॉफी मैच चल रहा था या अगले दिन मुझे खेलना था ये समय मेरे लिए काफी मुश्किल था फिर माने घरवालो से बात की या पूछा क्या एम खेल सकता हूँ तब घरवालो ने भी बोल दिया अब खेल के आजो।

दूसरे दिन माने मैच खेला या 90 रन पार आउट हुआ और टीम को जीत दिलाई तब मने एक चीज को सीखा जब आप किसी काम के पीछे समर्पित हो गए तब आपको कोई भी सिचुएशन रोक नहीं सकता था या ये सबक मेरी लाइफ में हमेशा काम आता था। और आज भी जब एम किसी एएसआइ सुरक्षा में तुरंत जाता हूं तब उसी समय को याद करता हूं।

वॉइस कैप्शन बनने पर ख़ुशी हुई।

जब आईपीएल चल रहा था तब वॉइस कैप्शन बनाया गया था तब मेरे लिए खुशी की बात थी और साथ में जिम्मेदारी भी ज्यादा हो गई थी आज मेरी उम्र 23 साल है तो मैं अभी थका नहीं हूं अभी मेरा खेलना बाकी है और कम उम्र में मुझे परफॉर्मेंस देना बहुत अच्छा लगता है।
वॉयस कैप्शन से मुझे ग्राउंड पर काफी कुछ सिखाने को मिला

सचिन से तुलना में बोले विराट।

एक फैंस ने उनसे सवाल किया कि सचिन तेंदुलकर से आप खुद को कैसे कैंपियर कराते हैं।

इस बात पर विराट कोहली ने कहा कि सचिन सर को मैं बचपन से टीवी पर देखता आया हूं वो मेरी प्रेरणा बने रहे उनसे खुद को कैंपियर कराना मैं ठीक नहीं समझता हूं और बस अपनी प्रस्तुति पर ध्यान देता हूं।

जब मैं पहली बार सचिन सर से मिला तब मैं काफी नर्वस था पर वो काफी विनम्र इंसान है। उनसे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला या जब कोई बड़े खिलाड़ी से मिलाता हूँ तब कुछ ना कुछ सिखाता हूँ।

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